तुम चुप क्यूँ हो? कुछ बोलते नहीं! किसी बात बुरी पे, तेज़ाब से खौलते नहीं गर्म जोरी, मुँह जोरी की ज़रूरत है, तुममे आग जगाने – तुम्हे आग दिखाने आया हूँ ठन्डे तुम्हारे खून में, मैं कोयला अंगार हूँ, तुम विश्वास रखो, तुम्हारे विश्वास का आधार हूँ। मुझे नहीं जानते? मैं कमज़ोरी का ध्वज नहीं, ना ही आलस्य का विहार ...

Green leaves remember our days of bliss, our first shared words, meet-up, hug and kiss. The fresh flower recite the poem I wrote for you the twisted branches witnessed the promises I broke for you. Just a moment ago, I glanced up and saw nothing remained of your vow. They say, and maybe it’s true – Love is a cup ...