‘मारो मत मुझको’, चिल्लायएक कहे – ‘मत काटो गाय’ जाने कब हमला हो जायकब चल जाए गोली, धांय हुए परेशां जुम्मन भायबच्चें उनके कुछ ना खाय ‘हरिया’ ‘हामिद’ को समझायखाना है तो मुर्गा लाय बच्चा बकरी का कटवायया फिर हरियर पान चबाय ‘गौ माता’ तो रोज़ ‘दुहाय’दूध मिले, पी लीजै चाय! ©सतीश कुमार ...

भूलोटन भूखा और नंगा हैसदियों सेवह मेरी कविता में आयाऔर घूमता रहा वहांभूखा और नंगा ही मैंने अपनी कविता मेंख़ूब नचाया उसेउसके आने सेख़ूब दाद मिलीमेरी कविता को मेरा कवि मन गदगद हुआ मगर भूखा, नंगा भूलोटनठेंगा दिखा रहामुझे और मेरी कविता को – ©® सतीश कुमार ...