भूलोटन भूखा और नंगा हैसदियों सेवह मेरी कविता में आयाऔर घूमता रहा वहांभूखा और नंगा ही मैंने अपनी कविता मेंख़ूब नचाया उसेउसके आने सेख़ूब दाद मिलीमेरी कविता को मेरा कवि मन गदगद हुआ मगर भूखा, नंगा भूलोटनठेंगा दिखा रहामुझे और मेरी कविता को – ©® सतीश कुमार ...

मैं भारत भाग्य विधाता हूँ। मैं ब्रह्म हूँ, मैं ही ओम हूँ ...