तुम चुप क्यूँ हो? कुछ बोलते नहीं! किसी बात बुरी पे, तेज़ाब से खौलते नहीं गर्म जोरी, मुँह जोरी की ज़रूरत है, तुममे आग जगाने – तुम्हे आग दिखाने आया हूँ ठन्डे तुम्हारे खून में, मैं कोयला अंगार हूँ, तुम विश्वास रखो, तुम्हारे विश्वास का आधार हूँ। मुझे नहीं जानते? मैं कमज़ोरी का ध्वज नहीं, ना ही आलस्य का विहार ...

ज़िन्दगी के इस भंवर में ढूंढने निकले खुद को हम, ...