तुम चुप क्यूँ हो? कुछ बोलते नहीं! किसी बात बुरी पे, तेज़ाब से खौलते नहीं गर्म जोरी, मुँह जोरी की ज़रूरत है, तुममे आग जगाने – तुम्हे आग दिखाने आया हूँ ठन्डे तुम्हारे खून में, मैं कोयला अंगार हूँ, तुम विश्वास रखो, तुम्हारे विश्वास का आधार हूँ। मुझे नहीं जानते? मैं कमज़ोरी का ध्वज नहीं, ना ही आलस्य का विहार ...

ऐ तकदीर लिखने वाले एक एहसान कर दे, जिंदगी तो तेरी ही दी है वो जिंदगी मेरे नाम कर दे. हर लम्हा खोजती है ये निगाहे, हर सूरत उससी हो, ये भी तू ऐलान कर दे, छुप – छुप के चाहते अरसो हुए, वो मेरा ही है ये तू सरेआम कर दे ऐ तकदीर लिखने वाले एक एहसान कर दे, ...

न मस्जिद की बात हो, न शिवालों की बात हो, जनता भूखी है, निवालों की बात हो, ...

मैं भारत भाग्य विधाता हूँ। मैं ब्रह्म हूँ, मैं ही ओम हूँ ...