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ज़िन्दगी एक – भंवर !!

hindi kavita

ज़िन्दगी के इस भंवर में
ढूंढने निकले खुद को हम,
अपने को तो, न खोज पाए,
पर खुद ही में हो गए हैं ग़ुम !

सोचा था कर जायेंगे कुछ हटके,
पर सोचने और करने के,
फासलों के बीचों बीच,
उलझ के रह गए न जाने क्यों हम !

ज़िन्दगी के इस भंवर में,
हो गए हैं न जाने कहा ग़ुम !

भागते भागते थक गए हैं,
परेशानियों से अब तो बाल भी पक गए हैं,
ज़िन्दगी के इस भंवर में,
जाने कहाँ खुद को छोड़ आये हैं हम !

जीवन का दूसरा नाम ही संघर्ष है,
तो क्यों न खुद को खुद से ढूंढ के लाये,
दवाईओं के ऊपर जी कर दिखलाये,
आने वाले पीढ़ियों के लिए मिसाल बन जाये,
क्यूंकि ज़िन्दगी तो हमेशा ही भंवर हैं,
हमे ही तराशना है खुद को खुद से,

नहीं होना है ग़ुम
नहीं होना है ग़ुम!

~ जिनसी रंजी ~

Written by Mukesh Pathak

Entrepreneur, CEO & Founder of Indian Achievers Story & Social Hindustan. | Best Content Creator 35 UNDER 35 Madhya Pradesh | Motivational Speaker & Mozilla Tech Speaker

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