Satish Kumar kavita

भूलोटन भूखा और नंगा है
सदियों से
वह मेरी कविता में आया
और घूमता रहा वहां
भूखा और नंगा ही

मैंने अपनी कविता में
ख़ूब नचाया उसे
उसके आने से
ख़ूब दाद मिली
मेरी कविता को

मेरा कवि मन

गदगद हुआ

मगर

भूखा, नंगा भूलोटन
ठेंगा दिखा रहा
मुझे और मेरी कविता को

– ©® सतीश कुमार

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