,

इंतज़ार

HIndi Kavita

वो बर्फ सा पिघल गया

जो नीर सा उबल गया

समय सा बदल गया

वो रीत सा जो ढल गया

उसका इंतज़ार मै क्यूँ करूं ?

सूर्य सा जो ढल गया

उजाले को निगल गया

काली स्याह रात में

मुँह छुपा निकल गया

तो सुबह तक –

उसका इंतज़ार में क्यूँ करूं ?

अकेली कहाँ

जो हवा मेरे संग है

याद कुछ प्रसंग है

यार मेरा जोश है

अपना मुझे होश है

मुझे नहीं कोई हया

तो वो, जो साथ छोड़ गया

मनमस्त राहो पर

उसका इंतज़ार में क्यूँ करूं?

~ तनिष्का पाटीदार ~

Written by Tanishka Patidar

"Serving humanity & scratching words to feed the soul"

Tanishka is the Co-Founder of Indian Achievers Story. This lover of pen and poetry is also a social worker.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Hindi Kavita

किसी दिन, दिन के उजाले में मिलेंगे हम

Satish Kumar kavita

फलना-ढिमका